तीन प्रणाम मरिया की भक्ति
तीन प्रणाम मरिया की भक्ति
पहला प्रणाम मरिया
ईश्वर पिता के सम्मान में, जिन्होंने अपनी महिमामय सर्वशक्ति में मेरी आत्मा को इस प्रकार विभूषित किया कि उनके बाद मैं स्वर्ग और पृथ्वी में सर्वशक्तिमती हूँ।
दूसरा प्रणाम मरिया
ईश्वर पुत्र की महिमा के लिए, जिन्होंने अपनी अगम्य प्रज्ञा की महानता में मुझे ज्ञान और समझ के ऐसे वरदानों से सुशोभित और परिपूर्ण किया कि मैं सब संतों से अधिक गहनता से परमपवित्र त्रियेक ईश्वर के दर्शन कर सकती हूँ।
उन्होंने मुझे इसके अतिरिक्त ऐसे प्रकाश में लपेट दिया कि मैं तेजस्वी सूर्य की तरह सारे स्वर्ग को आलोकित करती हूँ ...
तीसरा प्रणाम मरिया
पवित्र आत्मा की महिमा के लिए, जिन्होंने अपने प्रेम की मधुर परिपूर्णता मेरे हृदय में उंडेल दी और मुझे इतना भला और दयालु बनाया कि ईश्वर के बाद मैं सबसे कोमल और सबसे दयालु प्राणी हूँ ...