दैनिक समर्पण
दैनिक समर्पण
शाश्वत पिता, मरियम के परम निर्मल हाथों के द्वारा, मैं उस प्याले में, जिसे आज हर पुरोहित वेदी पर ऊँचा उठाता है, अपने विचार, अपना काम, अपने परिश्रम और दुःख, अपना वर्तमान, अपना अतीत, अपना भविष्य, अपने सब पाप, अपने सब प्रियजन, संसार की सब आत्माएँ, शोधन-स्थान की आत्माएँ, यहाँ तक कि मृत्यु को भी रखता हूँ।
मैं आपको अर्पित करता हूँ अपने हृदय की हर धड़कन, हर साँस, हर कदम, हर आवाज़, इस अभिप्राय से कि मेरे ये सब कर्म आपके द्वारा संसार के पापों के प्रायश्चित में उतने ही प्रेम के कार्यों में बदल जाएँ। ऐसा कीजिए कि आपके पुत्र यीशु मसीह के साथ मिलकर मेरा दिन एक निरन्तर मिस्सा हो, एक अटूट बलिदान, एक शाश्वत परमप्रसाद, ताकि आपके दिव्य न्याय को सन्तुष्टि मिले! आमेन।
इम्प्रिमातूर: 28.12.1970।